ब्रेकिंग न्यूज़
  • एन एच-24 के चौड़ीकरण का काम अभी तक भी शुरू नहीं हुआ है, मोदी जी| 2014 के संसदीय चुनावों के कुछ समय बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की गाजीपुर मंडी के सामने से होकर जान वाले नेशनल हाईवे (NH-24) को चौड़ा करने के कार्यक्रम का शिलान्यास किया था तथा घोषणा भी की थी कि यह काम यू.पी. चुनावों से पहले ही पूरा कर दिया जाएगा|
  • आम जनता में भय का वातावरण बना हुआ है| राजा व प्रजा का सम्बन्ध पिता व पुत्र जैसा होना चाहिए- किन्तु देश में इस समय ऐसा बिलकुल भी नहीं है| आम आदमी मोदी जी के नाम से काफी डरता है| आदर्श पंचायती राज के जनवरी 2017 के अंक में राजस्थान के जोगी गणेश नाथ ने बताया था कि राजस्थान के गांवों से पशुचोर व गौ-तस्कर किस प्रकार से गायों को सरेआम उठा कर ले जाते हैं|
  • गंगा की सफाई के नाम पर हजारों करोड़ डकारे जा रहे हैं, प्रधानमंत्री जी| वर्ष 2014 के संसदीय चुनावों के समय मोदी जी ने वाराणसी से चुनावी पर्चा भर कर जब देश के लोगों को बताया था कि उन्हें माँ गंगा ने वहाँ बुलाया है, तो देश के करोड़ों हिन्दुओं को लगा था कि अब जरुर माँ गंगे के दिन बहुर जाएँगे|
  • मरे ही तो एक सौ से ज्यादा हैं पर हजारों से भी ज्यादा तो अधमरे कर दिए हैं, मोदी जी की इस नोटबंदी ने| नोटबंदी के बाद मोदी जी ने टेलीविजन पर आकर कहा था कि नोटबंदी की परेशानी सिर्फ 50 दिनों तक झेलनी पड़ेगी, इसके बाद आम आदमी को कोई भी परेशानी नहीं होगी- नोटबंदी के बाद पचास दिनों के दौरान ही देशभर में 100 से अधिक लोगों की तो मौत के समाचार सुनने को मिल गए और अब सौ-सवा सौ दिनों के बाद तो हालात और भी बदतर नजर आने लगे हैं|
  • मोदी जी की नोटबंदी ने लोगों के प्रेमभाव को भी ख़तम कर दिया है| हमारे देश के गाँवों के परिवारों में प्रेम व भाई-चारा जो कई-कई पीढ़ियों से चला आ रहा था वह भी मोदी जी ने एक ही झटके में तोड़ दिया है| मोदी जी द्वारा 8 नवम्बर 2016 की शाम अचानक नोटबंदी की घोषणा के बाद कई परिवारों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई थी| ग्रामीण क्षेत्र के किसान भाई अधिकतर लेन-देन कैश में ही करते हैं, गेंहूँ की बुआई सिर पर थी-इसीलिए सभी ने बीज व खाद के लिए पैसों का इंतजाम भी कर रखा था| इसके अलावा छोटे-छोटे काम धन्धे वालों को भी कच्चा माल व मजदूरों को पेमेंट कैश में ही करनी पड़ती है|

धर्म

नीम का पेड़ चला

नीम का पेड़ चला
2016-11-30

नीम का पेड़ चला
पूज्य बापूजी की मधुमय अमृतवाणी
हमारे सद्गुरुदेव पूज्यपाद श्री लीलाशाह जी महाराज के जीवन की एक घटना बताता हूँ, सिंध में उन दिनों किसी जमीन के बारे में हिन्दू और मुसलमानों में झगड़ा चल रहा था। उस जमीन पर नीम का एक पेड़ खड़ा था, जिससे उस जमीन की सीमा-निर्धारण के बारे से कुछ विवाद था। हिन्दू और मुसलमान कोर्ट-कचहरी में धक्के खा-खाकर थक गये। आखिर दोनों पक्षों ने यह तय किया कि यह धार्मिक स्थान है। दोनों पक्षों में से जिस पक्ष का कोई पीर-फकीर इस स्थान पर अपना कोई विशेष तेजए बल या चमत्कार दिखा देए यह जमीन उसी पक्ष की हो जायेगी।
पूज्य लीलाशाहजी बापू का नाम पहले 'लीलाराम' था। हिन्दू भाई पूज्य लीलाराम जी के पास पहुंचे और बोले: 'हमारे तो आप ही एकमात्र संत हैं। हमसे जो हो सकता था वह हमने किया परंतु असफल रहे। अब समग्र हिन्दू समाज की प्रतिष्ठा आप श्री के चरणों में है।
इंसाँ दी अज्म से जब दूर किनारा होता है।
तूफाँ में टूटी किश्ती का एक भगवान सहारा होता है।।
अब संत कहो या भगवान कहोए आप ही हमारा सहारा हैं। आप ही कुछ करेंगे तो यह धर्मस्थान की जमीन बच सकेगी।'
संत तो मौजी होते हैं। जो अहंकार लेकर किसी संत के पास जाता हैए वह खाली हाथ लौटता है और जो विनम्रए कपटरहित हो शरणागति के सच्चे भाव से उनके सम्मुख जाता हैए वह कुछ पा लेता है। विनम्र और श्रद्धावान लोगों पर संत की करुणा कुछ देने को जल्दी उमड़ पड़ती है। पूज्य लीलारामजी उनकी बात मानकर उस स्थान पर जा के भूमि पर दोनों घुटनों के बीच सिर नीचा किये हुए शांत भाव से बैठ गये।
विपक्ष के लोगों ने उन्हें ऐसी सरल और सहज अवस्था में बैठे देखा तो समझ लिया कि ष्ये लोग इस साधु को व्यर्थ में ही लाये हैं। यह साधु क्या करेगा ! जीत हमारी होगी।ष् पहले मुस्लिम लोगों द्वारा आमंत्रित मुल्ला-मौलवियों, पीर-फकीरों ने जादू-मंत्रए टोने-टोट के आदि किये। 'अला बाँधूँ बला बाँधूँ...पृथ्वी बाँधूँ...तेज बाँधूँ... वायु बाँधूँ.. आकाश बाँधूँ...फूऽऽऽश् आदि-आदि किया। फिर पूज्य लीलारामजी की बारी आयी।
पूज्य लीलारामजी भले ही साधारण से लग रहे थे परन्तु उनके भीतर आत्मानंद हिलोरें ले रहा था। है 'पृथ्वी आकाश क्या समग्र ब्रहमांड में मेरा ही पसारा है...मेरी सत्ता के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता...ये चाँद-सितारे मेरी आज्ञा से चल रहे हैंण्ण्ण् इन सब विभिन्न रूपों में मैं.ही.मैं विलास कर रहा हूँ 'से ब्रह्मानंद में एकाकार हुए वे बैठे थे।
ऐसी आत्ममस्ती में बैठा हुआ किंतु बाहर से कंगाल जैसा दिखनेवाला संत जो बोल देए उसे घटित होने से कौन रोक सकता है। वसिष्ठजी कहते हैंरू श्श्हे रामजी ! त्रिलोकी में ऐसा कौन हैए जो संत की आज्ञा का उल्लंघन करके सुखी रह सके|

जब लोगों ने पूज्य लीलारामजी से प्रार्थना की तो उन्होंने धीरे से अपना सिर उपर उठाया। सामने ही नीम का पेड़ खड़ा था। उस पर दृष्टि डालकर गर्जना करते हुए आदेशात्मक भाव से बोल उठे: ऐ नीम ! उचित स्थान पर जा!'
बसए उनका ऐसा कहना ही था कि नीम का पेड़ श्सर्रर्र३ सर्रर्रण्ण्ण् करता हुआ दूर जाकर पूर्ववत् खड़ा हो गया। लोग तो यह देखकर अवाक् रह गये। आज तक किसी ने ऐसा चमत्कार नहीं देखा था। अब विपक्षी लोग भी उनके पैर पड़ने लगे। वे भी समझ गये कि ये कोई सिद्ध महापुरुष हैं। वे हिन्दू भाइयों से बोले: ये आपके ही पीर नहीं हैं बल्कि आपके और हमारेए सबके पीर हैं। अब से ये 'लीलाराम: नहीं, 'लाशाह' हैं।
तब से लोग उनका श्लीलारामश् नाम भूल ही गये और उन्हें श्लीलाशाहश् नाम से पुकारने लगे। लोगों ने उनके जीवन में ऐसे और भी कई चमत्कार देखे।
वे 93 वर्ष की उम्र पार करके ब्रह्मलीन हुए। इतने वृद्ध होने पर भी उनके सारे दाँत सुरक्षित थेए वाणी में तेज और बल था। वे नियमित रूप से आसन एवं प्राणायाम करते थे। मीलों पैदल यात्रा करते थे। वे आजन्म ब्रह्मचारी रहे। उनके कृपा-प्रसाद द्वारा कई पुत्र हीनों को पुत्र मिले, गरीबों को धन मिला, निरुत्साहियों को उत्साह मिला और जिज्ञासुओं का साधना मार्ग प्रशस्त हुआ। और भी क्या-क्या हुआ यह बताने जाऊँगा तो विषयांतर होगा और पूरा बता भी नहीं पाऊँगा। मैं यह बताना चाहता हूँ कि उनके द्वारा कई लीलाएँ हुईं। उनकी महानता चमत्कारों में निहित नहीं हैंए उनकी महानता तो उनकी ब्रह्मनिष्ठा में निहित है। ज्ञानेश्वर महाराज ने चबूतरा चला दिया। इन्होंने पेड़ चलाकर दोनों समाजों का पुराना झगड़ा सुलझा दिया।
छोटे-मोटे चमत्कार तो थोड़े-बहुत अभ्यास द्वारा हर कोई कर लेता हैए मगर ब्रह्मनिष्ठा तो चीज ही कुछ और है। वह तो सभी साधनाओं की अंतिम निष्पत्ति है। मैंने पहले भी कहा है कि केवल वीर्यरक्षा ब्रह्मचर्य नहीं है। यह तो ब्रह्मचर्य की साधना है। यदि शरीर द्वारा वीर्यरक्षा हो और मन-बुद्धि में विषयों का चिन्तन चलता रहे तो ब्रह्मनिष्ठा कहाँ हुई ! फिर भी वीर्यरक्षा द्वारा ही उस ब्रह्मानंद का द्वार खोलना शीघ्र सम्भव होता है। वीर्यरक्षण होए साक्षात्कार की तड़प हो और कोई समर्थ ब्रह्मनिष्ठ गुरु मिल जायें तो बस, फिर और कुछ करना शेष ही नहीं रहता। फिर वीर्यरक्षण करने में परिश्रम नहीं करना पड़ताए वह सहज होता है। साधक सिद्ध बन जाता है। फिर तो उनकी दृष्टिमात्र से कामुक भी संयमी बन जाता है।

भारत को एक ईसाई देश बनाने के लिए हिन्दुत्व के खिलाफ ईसायत का खुला युद्ध संग्राम |

  Qui wisi aliquam gubergren no, sed ei omnes expetenda

मिस्टर डेविड फ्राली एक अमेरिकन व्यक्ति जिसने भारत आकर वर्षों तक वैदिक हिन्दू-धर्म का गहन अध्यन किया था, उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली के एक राष्ट्रीय दैनिक अखबार को दिए अपने एक इंटरव्यु में भारत के नागरिकों को चेताते हुए जो कहा है वह केवल सनसनीखेज ही नहीं वह तो पूरे भारत देश के लिए एक खतरे की बहुत बड़ी घंटी भी है|

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भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी....

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श्रीरामचरितमानस में आता हैः भक्ति सुतंत्र सकल सुख खानी। बिनु सतसंग न पावहिं प्रानी।। यदि तुम विदेश जाना चाहो तो तुम्हारे पास पासपोर्ट होगा तब वीजा मिलेगा। वीजा होगा तब टिकट मिलेगी। फिर तुम हवाई जहाज में बैठकर अमेरिका जा सकोगे। यदि नौकरी चाहिए तो प्रमाणपत्रों की जरूरत पड़ेगी। अगर व्यापार करना हो तब भी धन की जरूरत पड़ेगी। किंतु भक्ति में ऐसा नहीं है कि तुम इतनी योग्यता प्राप्त करो तब भक्ति कर सकोगे.

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संत उत्पीड़न के कलंक को मिटा कर भाजपा इस चुनाव वैतरणी में उतरे तो ही श्रेष्ठ है!

  Qui wisi aliquam gubergren no, sed ei omnes expetenda

80 वर्षीय महान हिन्दू संत पूज्य श्री आशाराम जी बापू पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों से कारागार में कष्ट पा रहे हैं| भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म पर ईसाई मिशनरियों के सुनियोजित आक्रमण व धर्मांतरण का खुला विरोध करने के कारण ही कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने एक षड्यंत्र रचकर सितम्बर-2013 से उन्हें कारागार में भेज दिया है|

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पत्रकारिता यानी मास कम्यूनिकेशन

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पत्रकारिता यानी मास कम्यूनिकेशन समय के साथ काफी बदल चुका है. नई-नई तकनीकों के कारण अब पत्रकारिता के कई प्लेटफॉर्म देखने को मिल रहे हैं. प्रिंट, रेडियो और टीवी के बाद पत्रकारिता का भविष्य वेब पर आ गया है. अगर आप की दिलचस्पी समाचार , दुनिया में घट रही घटनाओं और लिखने में है तो आप इस फील्ड में आ सकते हैं. पत्रकारिता में करियर बनाने के लिए किसी भी स्ट्रीम से 12वीं पास होना जरूरी है. 12वीं के बाद आप चाहें तो डिप्लोमा, सर्टिफिकेट या डिग्री कोर्स कर सकते हैं. भारत के कई बड़े कॉलेजों में डिग्री लेवल पर मास मीडिया की पढ़ाई होती है. अगर आप ग्रेजुएशन के बाद पत्रकारिता की पढ़ाई करना चाहते हैं तो यह आपके लिए ज्यादा फायदेमंद होगी. ग्रेजुएशन के बाद पीजी डिप्लोमा इन मास कम्यूनिकेशन, डिप्लोमा इन पब्लिक रिलेशन कर सकते हैं. वहीं, सीधे दो वर्षीय पीजी डिग्री भी हासिल कर सकते हैं. वहीं, पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद आप सीधे पीएचडी या एमफील भी कर सकते हैं. पत्रकारिता के प्रमुख कोर्सेज: बैचलर डिग्री इन मास कम्यूनिकेशन पीजी डिप्लोमा इन ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म एमए इन जर्नलिज्म डिप्लोमा इन जर्नलिज्म जर्नलिज्म एंड पब्लिक रिलेशन पीजी डिप्लोमा इन मास मीडिया जर्नलिज्म की पढ़ाई के लिए प्रमुख संस्थान: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन माखनला चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म मास मीडिया रिसर्च सेंटर, जामिया मिलिया इस्लामिया जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन दिल्ली यूनिवर्सिटी जर्नलिज्म कोर्स के महत्वपूर्ण फील्ड: प्रिंट जर्नलिज्म: यह पत्रकारिता का सबसे पुराना फील्ड है जो भारत में अभी भी लोकप्रिय है. देश के कई भाषाओं में प्रिंट जर्नलिज्म के मौके उपलब्ध हैं. प्रिंट में मुख्य रूप से मैग्जीन, अखबार के लिए काम कर सकते हैं. इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म: इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म पत्रकारिता को अक्षरों की दुनिया से निकालकर विजुअल की दुनिया में ले आया. ऑडियो, वीडियो, टीवी, रेडियो के माध्यम से यह दूर-दराज के क्षेत्र में भी लोकप्रिय होने लगा. टीवी सैटेलाइट, केबल सर्विस और नई तकनीकों के माध्यम से पत्रकारिता का यह सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है. वेब पत्रकारिता: पत्रकारिता के इस प्लेटफॉर्म ने रीडर, विजिटर्स को फीडबैक की सुविधा दी, यानी आप न्यूज मेकर से सीधे सवाल पूछ सकते हैं. स्मार्ट फोन के आ जाने से यह दिनप्रतिदिन आगे बढ़ रही है. पत्रकारिता के भविष्य के रूप में इस माध्यम को स्थापित किया जा रहा है. पब्लिक रिलेशन: यह क्षेत्र पत्रकारिता से थोड़ा हटकर है, जर्नलिज्म की पढ़ाई के दैरान इसे भी पढ़ाया जाता है. किसी व्यक्ति, संस्थान की छवि को लोगों की नजर में सकारात्मक रुप से प्रस्तुत करना पब्लिक रिलेशन में आता है. पब्लिक रिलेशन का कोर्स करने के बाद बिजनेस हाउसेज, पॉलिटिकल पर्सन, सेलेब्रेटी और संस्थानों के लिए काम किया जाता है. जरुरी योग्यता: जर्नलिज्म के फील्ड में करियर बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है आपका मानसिक रूप से मजबूत होना यानी किसी भी परिस्थिति में खुद पर विश्वास करके काम पर ध्यान देना. वहीं, जर्नलिस्ट होने के लिए बेहतरीन कम्यूनिकेशन स्किल्स के साथ समाचारों से खुद को अपडेट रखना जर्नलिज्म का सबसे बड़ा नियम है. आपके विचारों में निष्पक्षता होनी चाहिए, कोई भी चीज कहने से पहले आपके पास उसके प्रूफ होने चाहिए. आपकी सोच किसी भी विषय पर एक विश्लेषक की तरह हो, यह सबसे ज्यादा जरूरी होता है. क्या करना होगा आपको: पत्रकार के रूप में आपको फील्ड और डेस्क दोनों पर काम करना पड़ सकता है. फील्ड वर्क में रिपोर्टर और रिसर्च डिपार्टमेंट का काम होता है. फील्ड वर्क के काम में वे लोग ज्यादा अच्छा कर सकते हैं जिन्हें सोसाइटी की समझ है और संपर्क सूत्र अच्छे हें. एक रिपोर्टर का प्रमुख काम होता है प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाना, इंटरव्यू लेना, किसी घटना की जानकारी इकट्ठा करना. अगर आपकी दिलचस्पी फोटोग्राफी में है तो आपको फील्ड में कैमरामैन का काम मिल सकता है. कैमरामैन का काम सिर्फ फोटो खींचना नहीं होता है बल्कि ऐसे फोटो लाना होता है जो न्यूज के साथ मिल सके. वहीं, डेस्क पर न्यूज राइटिंग, एडिटिंग का काम मिलता है. इसके लिए आपके पास भाषा ज्ञान होना आवश्यक है. नौकरी के अवसर: पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद आपको न्यूज एजेंसी, न्यूज वेबसाइट, प्रोडक्शन हाउस, प्राइवेट और सरकारी न्यूज चैनल, प्रसार भारती, पब्लिकेशन डिजाइन, फिल्म मेकिंग में रोजगार से अवसर मिलते हैं. आप चाहें तो फ्रीलान्सिंग भी कर सकते हैं.

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